Tuesday, May 17, 2011

an attempt by the ppl

एक गाँव जहाँ पर लोग अपने उपनाम के रूप में अपने गाँव का नाम लगते हैं. एक गाँव जहा पर कोई भी आदमी शराब नहीं पीता है एक गाँव जहा पर टीचर स्कूल से गायब नहीं होते हैं. एक गाँव जहाँ आंगनवाडी रोज़ खुलती है. एक गाँव जहा पर राशन व्यवस्था ग्राम सभा  के अनुसार संचालित होती है. एक गाँव जहाँ की सड़कों पर गन्दगी नहीं है. एक गाँव जिसे जल संरक्षण के लिए राष्ट्रपति पुरुस्कार मिला है. यह उस गाँव के हाल हैं जहाँ सत्ता दिल्ली में बैठी सरकार नहीं बल्कि उसी उसी गाँव के लोगों द्वारा चलाई जाती है. महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के गाँव "हिवरे बाज़ार" में. 
यह बिलकुल फ़िल्मी पटकथा की तरह लगता है. लेकिन है बिलकुल सच...
हिवरे बाज़ार के कुछ पढ़े-लिखे युवाओं ने यह बीड़ा उठाया कि क्यों का अपने गाँव को संवारा जाये. गाँव वालों ने भी युवकों कि चुनौती को गंभीरता से लिए और नवयुवको को जिम्मेदारी दे दी. 
गाँव में पहली ग्राम सभा की गयी और चुनी गयीं प्राथमिकतायें. बिजली पानी के बीच बात पढाई की भी आई. इस समय तक स्कूल में टीचर आते नही थे. आते थे तो बच्चो से शराब मंगवाकर पीते थे. स्कूल में न तो खेल का मैदान और ना ही बैठने की व्यवस्था थी. ग्राम सभा में सबसे पहले युवकों ने गाँव वालों से अपील की कि अपने बंज़र पड़ी ज़मीन को स्कूल के लिए दान दें. शुरू में दो परिवार तैयार हुआ और बाद में कई. गाँव वालों के श्रमदान कि बदौलत दो कमरों का निर्माण हुआ.
सिंचाई के लिए पानी तो था ही नहीं. सरपंच पोपटराव कहते हैं कि हमने सामूहिक रूप से इस विषय पर सोचना शुरू किया. हमने 10 लाख पेड़ लगाये और 99 प्रतिशत सफल हुए. पानी का स्तर बढ़ा. भूमिहीनों को गाँव में ही कम मिलने लगा. गाँव कि ही ताराबाई कहती हैं कि पहले मजदूरी करने पास के गाँव में जाना पड़ता था. आज हमारे पास 17 गाय हैं. पूरे गाँव से लगभग 5000 लीटर दूध प्रतिदिन बेचा जाता है. आज गाँव कि प्रतिव्यक्ति वार्षिक आय 800 रूपये से बढ़कर 28000 हो गयी है.
आंगनवाडी कार्यकर्ता इराबाई कहती है कि जब बच्चो कि जिम्मेदारी मेरी है तो फिर  मैं क्यों ना काम करू.  मैं कुछ गड़बड़ भी करती हूँ तो मुझे ग्राम सभा में जवाब देना होता है. वे बड़े गर्व से कहती हैं कि मेरी आंगनवाडी को केंद्र सरकार से सर्वश्रेष्ठ आंगनवाडी का अवार्ड मिला है. 
गाँव का स्कूल अब हायर सेकेंडरी तक हो गया है. शिक्षिका शोभी थांगे कहती हैं कि हम लोग गर्मियों कि छुट्टियों में भी स्कूल आते हैं. यहाँ पढाई किसी बड़े कॉन्वेंट स्कूल से बेहतर होती है. इसलिए ही अब शहरों से बच्चे पढने यहाँ  गाँव में आते हैं. सरपंच पोपटराव कहता हैं कि हमारे यहाँ शिक्षकों को ग्राम सभा में आना जरूरी होता है.

राशन दुकान संचालक आबदास बेबाक तरीके से कहते हैं कि मुझे फ़ूड इंस्पेक्टर को रिश्वत देनी नहीं होती. मेरी तोल में कुछ गड़बड़ हो तो मुझसे ग्रामसभा में जवाब माँगा जाता है. और जब मुझे रिश्वत नहीं देनी है और यह मेरा अपना गाँव है तो मैं फर्जीवाडा क्यों करू. 
सरपंच कहते हैं कि ये सारे महवपूर्ण निर्णय जहाँ पर बैठकर लिए जाते हैं उस जगह का नाम है ग्राम संसद. हम महीने में चार बार ग्राम सभाएं करते हैं. हम कोशिश करते हैं कि हर व्यक्ति आये और बात करे. महिलाएं विशेष रूप से. जाहिर है कि उनकी बात को सुना जायेगा. यदि नहीं सुना जायेगा तो फिर वे आयेंगे ही क्यों. फिर कहा रह जाएगी यहाँ ग्राम सत्ता.

यहाँ पंचायत भवन में प्रतिमाह पैसों का पूरा रिकॉर्ड लिखकर टांग दिया जाता है, पंचायत सचिव ज्ञानेश्वेर कहते हैं कि साल के अंत में ग्राम सभा का पूरा रिकॉर्ड गाँव वालों के सामने और बाहरी लोगों को बुलाकर बताया जाता है.

सूचना के अधिकार और स्वराज पर कम कर रहे मैग्सेसे पुरुस्कार विजेता अरविन्द केजरीवाल कहते हैं कि - जब मैं इस गाँव में आया तो मुझे लगा कि मैं किसी और देख में हों. ना भ्रष्टाचार, ना सरकारी ढर्रा..बस अपना राज - ग्राम स्वराज....





11 comments:

  1. First of all congrats for your new blog and first post.

    Really one must visit this village at least once.. I am sure that we will feel that we can bring the change in society ourself..just WILL is required for that..

    I wish we can start these type of things at least from our locality..

    Bhai wn i go to Pune. i will definalty visit this place.. thanks for updating..

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  2. Many-many congratulations to u bhaiya 4 ur 1st post........
    Its like a dream village so i wanna visit tht...n this shows that we can change anythin if we want..just we need to take a step....

    Really nice.... :)

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  3. thnx ankur ji.. ur words will work for me.. thnx

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  4. A gud initiative to awake India..

    "BEDAKPALLI" as my last name is the name of my village... but I never went... coz it exists no more..

    this post make me think bout my present village.

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  5. Congrats bhaiya on ur blog n 1st post.. and on ur attempt to bring the real India infront of us.

    Villages of these sort should be appreciated n given proper help by govt. to flourish n show the talent.
    Would seriously love to visit such a place.

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  6. Congrats bhaiya for your blog...
    its a very convenient way to reach maximum people living in India...
    i hope your message reaches every corner of India and all of us take efforts to make our city an 'Ideal City'

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  7. grt work sir ji, congrats also ur blog
    we must want to know india.
    udaipur k baare main bhi jarur likna,

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  8. Desh prem ka januun hai.............

    Pura desh Sundar hai..............

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  9. nell ji aaj ke yuva ko ek nayi disah dene ka pryash bhut aacha hai

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  10. jab ek gao wale aisa kar sakte hain....to poora desh kyun nahi....sab yahi sawal khtakta hain???

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  11. आपके लेख भारत माता की मिटटी की खुशबु से भरे है. आप ऐसे ही महकते रहे...

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